श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 9: प्रलम्ब-वध  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  5.9.18-19 
सङ्कर्षणस्तु तं दृष्ट्वा दग्धशैलोपमाकृतिम्।
स्रग्दामलम्बाभरणं मुकुटाटोपमस्तकम्॥ १८॥
रौद्रं शकटचक्राक्षं पादन्यासचलत्क्षितिम्।
अभीतमनसा तेन रक्षसा रोहिणीसुत:।
ह्रियमाणस्तत: कृष्णमिदं वचनमब्रवीत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तब माला और आभूषणों से विभूषित, सिर पर मुकुट धारण किए हुए, गाड़ी के पहिये के समान भयानक नेत्रों वाले, पैरों के प्रहारों से पृथ्वी को कंपा देने वाले और जले हुए पर्वत के समान आकार वाले उस दैत्य को उस निर्भय दैत्य द्वारा ले जाते हुए देखकर बलभद्र ने कृष्णचन्द्र से कहा-॥18-19॥
 
Then seeing that demon, adorned with garlands and ornaments, wearing a crown on his head, having terrible eyes like the wheels of a cart, shaking the earth with his foot strikes and having a size like a burnt mountain, being carried away by that fearless demon, Balabhadra said to Krishnachandra -॥ 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)