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श्लोक 5.8.13  |
ततो गावो निराबाधास्तस्मिंस्तालवने द्विज।
नवशष्पं सुखं चेरुर्यन्न भुक्तमभूत्पुरा॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| हे ब्राह्मण! तब से उस तालवन में गौएँ बिना किसी बाधा के उस नए घास को चरने लगीं, जिसे वे पहले कभी नहीं चर पाती थीं॥13॥ |
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| O Brahmin! From then on the cows in that taal grove began to graze the new grass without any hindrance which they had never been able to graze before.॥ 13॥ |
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| इति श्रीविष्णुपुराणे पञ्चमेंऽशे अष्टमोऽध्याय:॥ ८॥ |
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