श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 7: कालिय-दमन  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  5.7.71 
सर्पजातिरियं क्रूरा यस्यां जातोऽस्मि केशव।
तत्स्वभावोऽयमत्रास्ति नापराधो ममाच्युत॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
हे केशव! मैं जिस सर्प योनि में उत्पन्न हुआ हूँ, वह अत्यंत क्रूर है, यह मेरा जातिगत स्वभाव है। हे अच्युत! इसमें मेरा कोई दोष नहीं है ॥ 71॥
 
O Keshav! The snake species in which I was born is extremely cruel, this is my racial nature. O Achyuta! I am not at fault in this. ॥ 71॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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