श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 7: कालिय-दमन  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  5.7.69 
हृदि संकल्प्य यद्रूपं ध्यानेनार्चन्ति योगिन:।
भावपुष्पादिना नाथ: सोऽच्यर्ते वा कथं मया॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
मैं किस प्रकार आपकी पूजा कर सकता हूँ, जिन प्रभु का योगीजन मन में ध्यान और कल्पना करके तथा पुष्प आदि अर्पित करके पूजन करते हैं? ॥69॥
 
How can I worship You, the Lord Whose form the Yogis worship by meditating and visualizing in their minds and offering flowers etc.? ॥ 69॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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