श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 7: कालिय-दमन  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  5.7.64 
एकावयवसूक्ष्मांशो यस्यैतदखिलं जगत्।
कल्पनावयवस्यांशस्तस्य स्तोष्यामि किन्न्वहम्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
मैं आपकी स्तुति कैसे करूँ, क्योंकि यह सम्पूर्ण जगत् आपकी कल्पना का एक छोटा-सा अंश मात्र है ॥ 64॥
 
How can I praise You, of whom this entire universe is only a tiny part of Your imaginary being? ॥ 64॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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