vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 7: कालिय-दमन
»
श्लोक 63
श्लोक
5.7.63
यस्माद्ब्रह्मा च रुद्रश्च चन्द्रेन्द्रमरुदश्विन:।
वसवश्च सहादित्यैस्तस्य स्तोष्यामि किन्न्वहम्॥ ६३॥
अनुवाद
जिनसे ब्रह्मा, रुद्र, चन्द्रमा, इन्द्र, मरुद्गण, अश्विनकुमार, वसुगण और आदित्य आदि सभी उत्पन्न हुए हैं, मैं आपकी स्तुति किस प्रकार करूँ?॥ 63॥
How can I praise you, from whom Brahma, Rudra, Chandra, Indra, Marudgan, Ashvinkumar, Vasusgan and Aditya etc. have all been born?॥ 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×