श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 7: कालिय-दमन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  5.7.60 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्ते ताभिराश्वस्य क्लान्तदेहोऽपि पन्नग:।
प्रसीद देवदेवेति प्राह वाक्यं शनै: शनै:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - नागों की पत्नियों की यह बात सुनकर नागराज ने थके होने पर भी साहस करके धीरे से कहा - "हे देवों के देव! प्रसन्न होइए।"
 
Shri Parashar ji said - On hearing the wives of the serpents say this, the King of Serpents, in spite of being tired, gathered some courage and slowly said, "Oh Lord of Lords! Be happy." 60.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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