श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 7: कालिय-दमन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.7.6 
अस्मिन्वसति दुष्टात्मा कालियोऽसौ विषायुध:।
यो मया निर्जितस्त्यक्त्वा दुष्टो नष्ट: पयोनिधिम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उसमें दुष्टात्मा कालियानाग रहता है जिसका शस्त्र विष है और वह दुष्ट मुझसे [अर्थात् मेरी शक्ति गरुड़ से] पराजित होकर समुद्र छोड़कर भाग गया है॥6॥
 
The evil spirit Kalianag lives in it whose weapon is poison and the evil one who has been defeated by me [i.e. my power Garuda] has left the ocean and fled.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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