| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 7: कालिय-दमन » श्लोक 50 |
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| | | | श्लोक 5.7.50  | यस्याखिलमहीव्योमजलाग्निपवनात्मकम्।
ब्रह्माण्डमल्पकाल्पांश: स्तोष्यामस्तं कथं वयम्॥ ५०॥ | | | | | | अनुवाद | | पृथ्वी, आकाश, जल, अग्नि और वायु से युक्त यह सम्पूर्ण जगत् जिसका एक छोटा-सा अंश मात्र है, उसकी हम स्तुति कैसे कर सकते हैं? ॥50॥ | | | | How can we praise the One of whom this entire universe consisting of earth, sky, water, fire and air is just a tiny part? ॥ 50॥ | | ✨ ai-generated | | |
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