| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 7: कालिय-दमन » श्लोक 37 |
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| | | | श्लोक 5.7.37  | सेन्द्रै रुद्राग्निवसुभिरादित्यैर्मरुदश्विभि:।
चिन्त्यसे त्वमचिन्त्यात्मन्समस्तैश्चैव योगिभि:॥ ३७॥ | | | | | | अनुवाद | | हे अचिन्त्यात्मन! इंद्र, रुद्र, अग्नि, वसु, आदित्य, मरुद्गण और अश्विनी कुमार तथा सभी योगी आपका ही चिंतन करते हैं। 37॥ | | | | O Achintyaatman! Indra, Rudra, Agni, Vasu, Aditya, Marudgan and Ashwini Kumar and all the yogis think about you. 37॥ | | ✨ ai-generated | | |
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