श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 7: कालिय-दमन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.7.36 
त्वमेव जगतो नाभिरराणामिव संश्रय:।
कर्त्तापहर्त्ता पाता च त्रैलौक्यं त्वं त्रयीमय:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जैसे पहिये का हब आरों को धारण करता है, वैसे ही आप जगत के आधार, स्रष्टा, संहारक और रक्षक हैं। आप तीनों लोकों और तीनों वेदों के स्वरूप हैं।॥36॥
 
Just as the hub of a wheel supports the spokes, similarly you are the support, creator, destroyer and protector of the universe. You are the form of the three worlds and the three Vedas. ॥36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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