श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 7: कालिय-दमन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.7.32 
भोगेनावेष्टितस्यापि सर्पराजस्य पश्यत।
स्मितशोभि मुखं गोप्य: कृष्णस्यास्मद्विलोकने॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे गोपियों! देखो! सर्पराज के फन से ढके हुए भी, हमें देखकर श्रीकृष्ण का मुख मधुर मुस्कान से सुशोभित हो रहा है॥ 32॥
 
Oh Gopis! Look! Even though covered by the hood of the King of Serpents, Shri Krishna's face is adorned with a sweet smile on seeing us. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)