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श्लोक 5.7.27  |
दिवस: को विना सूर्यं विना चन्द्रेण का निशा।
विना वृषेण का गावो विना कृष्णेन को व्रज:॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| सूर्य के बिना दिन कैसा? चन्द्रमा के बिना रात्रि कैसी? बैलों के बिना गायें कैसी? इसी प्रकार कृष्ण के बिना व्रज का क्या उपयोग?॥27॥ |
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| What is the day without the Sun? What is the night without the Moon? What are cows without bulls? Similarly, what is the use of Vraja without Krishna?॥ 27॥ |
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