श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 7: कालिय-दमन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.7.2 
स जगामाथ कालिन्दीं लोलकल्लोलशालिनीम्।
तीरसंलग्नफेनौघैर्हसन्तीमिव सर्वत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
घूमते-घूमते वे यमुना नदी के तट पर पहुँचे, जो अपनी चंचल लहरों से सुशोभित थी, और जिसके किनारों पर झाग इकट्ठा हो गया था, और जो चारों ओर से मानो हँस रही थी॥2॥
 
Wandering about they reached the banks of the river Yamuna, adorned with its playful waves, which appeared as if laughing from all sides as the foam gathered on its banks.॥2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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