श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 6: शकटभंजन, यमलार्जुन-उद्धार, व्रजवासियोंका गोकुलसे वृन्दावनमें जाना और वर्षा-वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  5.6.50 
विकाले च समं गोभिर्गोपवृन्दसमन्वितौ।
विहृत्याथ यथायोगं व्रजमेत्य महाबलौ॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
सायंकाल के समय वन में रमण करके वह महाबली बालक गौओं और ग्वालबालों के साथ व्रज में लौट आता था ॥50॥
 
In the evening, after having a suitable pastime in the forest, that mighty boy used to return to Vraja along with the cows and the cowherd boys. ॥50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)