श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 6: शकटभंजन, यमलार्जुन-उद्धार, व्रजवासियोंका गोकुलसे वृन्दावनमें जाना और वर्षा-वर्णन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.6.43 
मार्गा बभूवुरस्पष्टास्तृणशष्पचयावृता:।
अर्थान्तरमनुप्राप्ता: प्रजडानामिवोक्तय:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
वह मार्ग अत्यंत मूर्ख लोगों के निरर्थक वचनों के समान घास और खरपतवारों से आच्छादित होकर अंधकारमय हो गया ॥43॥
 
Like the nonsense words of very foolish people, the path became obscure by being covered with grass and weeds. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)