श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 6: शकटभंजन, यमलार्जुन-उद्धार, व्रजवासियोंका गोकुलसे वृन्दावनमें जाना और वर्षा-वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.6.40 
निर्गुणेनापि चापेन शक्रस्य गगने पदम्।
अवाप्यताविवेकस्य नृपस्येव परिग्रहे॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जैसे गुणहीन मनुष्य अज्ञानी राजा की संगति में रहकर सम्मान प्राप्त करता है, वैसे ही गुणहीन इन्द्रधनुष आकाश में स्थित हो गया ॥40॥
 
Just as a man without qualities gains honour in the company of an ignorant king, similarly the rainbow without qualities came to be situated in the sky. ॥40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)