श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 6: शकटभंजन, यमलार्जुन-उद्धार, व्रजवासियोंका गोकुलसे वृन्दावनमें जाना और वर्षा-वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.6.24 
वृन्दावनमित: स्थानात्तस्माद‍्गच्छाम मा चिरम्।
यावद्भौममहोत्पातदोषो नाभिभवेद‍्वजम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अतः जब तक कोई महान पृथ्वी-संबंधी विपत्ति व्रज को नष्ट न कर दे, तब तक हम लोग इस स्थान से तुरन्त वृन्दावन के लिए प्रस्थान करें।’ ॥24॥
 
Therefore, unless some great earth-related calamity destroys Vraja, let us immediately depart from this place for Vrindavan.' ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)