श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 4: वसुदेव-देवकीका कारागारसे मोक्ष  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.4.11 
तद्ये यशस्विन: केचित्पृथिव्यां ये च याजका:।
कार्यो देवापकाराय तेषां सर्वात्मना वध:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अतः जो कोई पृथ्वी पर यशस्वी और यज्ञ करनेवाला हो, उसे देवताओं का अहित करने के कारण पूर्णतः मार डालना चाहिए॥11॥
 
Therefore, whoever is famous and performs Yagya on earth should be completely killed for doing any disservice to the gods. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)