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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण
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श्लोक 80
श्लोक
5.38.80
तं दृष्ट्वा गूहमानानां यासां हास: स्फुटोऽभवत्।
ताश्शशाप मुनि: कोपमवाप्य कुरुनन्दन॥ ८०॥
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! जिन अप्सराओं की हँसी छिपाने पर भी प्रकट हो रही थी, उन्हें देखकर ऋषि ने क्रोध में आकर इस प्रकार शाप दिया -॥80॥
On seeing him the Apsaras whose laughter became apparent despite trying to hide it, O son of Kuru! The sage in anger cursed them thus -॥ 80॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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