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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण
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श्लोक 48
श्लोक
5.38.48
निर्यौवना गतश्रीका नष्टच्छायेव मेदिनी।
विभाति तात नैकोऽहं विरहे तस्य चक्रिण:॥ ४८॥
अनुवाद
हे प्रिये! उन चक्रपाणि कृष्णचन्द्र के अभाव में मैं ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण पृथ्वी यौवन, सौन्दर्य और तेज से रहित प्रतीत होती है॥48॥
O dear! In the absence of that Chakrapani Krishnachandra, not just me but the entire earth seems devoid of youth, beauty and radiance. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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