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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण
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श्लोक 21
श्लोक
5.38.21
ततोऽर्जुनो धनुर्दिव्यं गाण्डीवमजरं युधि।
आरोपयितुमारेभे न शशाक च वीर्यवान्॥ २१॥
अनुवाद
तब वीर अर्जुन ने अपना युद्ध-ग्रस्त गाण्डीव धनुष चढ़ाना चाहा; परन्तु वे ऐसा न कर सके॥21॥
Then the brave Arjun tried to offer his battle-worn Gandiva bow; But they could not do this. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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