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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण
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श्लोक 17
श्लोक
5.38.17
यष्टिहस्तानवेक्ष्यास्मान्धनुष्पाणिस्स दुर्मति:।
सर्वानेवावजानाति किं वो बाहुभिरुन्नतै:॥ १७॥
अनुवाद
हमारे हाथों में लाठियाँ देखकर यह दुष्टबुद्धि मनुष्य धनुष उठाकर हम सबकी आज्ञा का उल्लंघन करता है। फिर हमारी बलवान भुजाओं का क्या उपयोग है?॥17॥
Seeing the sticks in our hands, this evil-minded person takes up the bow and disobeys us all. Then what is the use of our strong arms?'॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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