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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण
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श्लोक 15
श्लोक
5.38.15
अयमेकोऽर्जुनो धन्वी स्त्रीजनं निहतेश्वरम्।
नयत्यस्मानतिक्रम्य धिगेतद्भवतां बलम्॥ १५॥
अनुवाद
देखो! यह धनुर्धर अर्जुन अकेला ही हम लोगों को पकड़कर इन अनाथ स्त्रियों को ले जा रहा है; हमारे पुरुषार्थ को धिक्कार है!॥15॥
Look! this archer Arjuna alone overtakes us and takes away these orphan women; shame on our efforts!॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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