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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
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श्लोक 15
श्लोक
5.37.15
विज्ञातपरमार्थोऽपि भगवान्मधुसूदन:।
नैच्छत्तदन्यथा कर्तुं विधिना यत्समीहितम्॥ १५॥
अनुवाद
भगवान मधुसूदन इन सब बातों को यथावत् जानते थे, फिर भी वे विधाता की इच्छा के अनुसार अन्यथा कुछ करना नहीं चाहते थे ॥15॥
Lord Madhusudan knew all these things as they were, yet he did not want to do otherwise as per the wishes of the Creator. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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