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श्लोक 5.35.38  |
ततस्तु कौरवास्साम्बं सम्पूज्य हलिना सह।
प्रेषयामासुरुद्वाहधनभार्यासमन्वितम्॥ ३८॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् कौरवों ने बलरामजी सहित शम्बक का पूजन किया और उन्हें कन्या तथा बहुत से दहेज के साथ द्वारकापुरी वापस भेज दिया। |
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| Thereafter the Kauravas worshipped Sambaka along with Balramji and sent them back to Dwarkapuri along with the bride and lots of dowry. |
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| इति श्रीविष्णुपुराणे पञ्चमेंऽशे पञ्चत्रिंशोऽध्याय:॥ ३५॥ |
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