श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 35: साम्बका विवाह  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.35.33 
राम राम महाबाहो क्षम्यतां क्षम्यतां त्वया।
उपसंह्रियतां कोप: प्रसीद मुसलायुध॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे राम! हे राम! हे महाबाहो! मुझे क्षमा करें, मुझे क्षमा करें। हे मुसलायुध! अपना क्रोध शांत करें और प्रसन्न हों॥ 33॥
 
[And he said—] "O Rama! O Rama! O Mahabaho! Forgive me, forgive me. O Musalayudha! Calm down your anger and be happy.॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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