श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 35: साम्बका विवाह  »  श्लोक 27-29
 
 
श्लोक  5.35.27-29 
कर्णं दुर्योधनं द्रोणमद्य भीष्मं सबाह्लिकम्।
दुश्शासनादीन्भूरिं च भूरिश्रवसमेव च॥ २७॥
सोमदत्तं शलं चैव भीमार्जुनयुधिष्ठिरान्।
यमौ च कौरवांश्चान्यान्हत्वा साश्वरथद्विपान्॥ २८॥
वीरमादाय तं साम्बं सपत्नीकं तत: पुरीम्।
द्वारकामुग्रसेनादीन्गत्वा द्रक्ष्यामि बान्धवान्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
आज मैं कर्ण, दुर्योधन, द्रोण, भीष्म, बाह्लीक, दुःशासनादि, भूरि, भूरिश्रवा, सोमदत्त, शल, भीम, अर्जुन, युधिष्ठिर, नकुल और सहदेव तथा अन्य समस्त कौरवों को उनके हाथी, घोड़े और रथों सहित मारकर तथा नववधू सहित वीरवर साम्ब को साथ लेकर द्वारकापुरी में जाकर उग्रसेन आदि अपने सम्बन्धियों से मिलूँगा और उनसे मिलूँगा ॥27-29॥
 
Today, after killing Karna, Duryodhana, Drona, Bhishma, Bahlik, Dusshasanadi, Bhuri, Bhurishrava, Somdatta, Shala, Bhima, Arjun, Yudhishthir, Nakul and Sahadeva and all the other Kauravas along with their elephants, horses and chariots and taking Veervar Samb along with the new bride, I will go to Dwarkapuri and meet my relatives like Ugrasena and others. I will see. 27-29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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