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श्लोक 5.35.26  |
समस्तभूभृतां नाथ उग्रसेनस्स तिष्ठतु।
अद्यनिष्कौरवामुर्वीं कृत्वा यास्यामि तत्पुरीम्॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| उग्रसेन ही सब राजाओं का राजा रहे। आज मैं ही पृथ्वी को कौरवों से रहित करके उनकी द्वारकापुरी को जाऊँगा॥ 26॥ |
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| Let Ugrasen alone remain the king of all kings. Today I alone will make the earth free of Kauravas and go to his Dwarkapuri.॥ 26॥ |
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