श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 35: साम्बका विवाह  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.35.24 
उग्रसेन: समध्यास्ते सुधर्मां न शचीपति:।
धिङ्मानुषशतोच्छिष्टे तुष्टिरेषां नृपासने॥ २४॥
 
 
अनुवाद
आज राजा उग्रसेन स्वयं सुधर्मा सभा में बैठे हैं, यहाँ तक कि इन्द्र भी उसमें बैठने में समर्थ नहीं हैं। परन्तु इन कौरवों को धिक्कार है, जो सैकड़ों मनुष्यों के सिंहासन से इतने संतुष्ट हैं॥24॥
 
Today King Ugrasen himself sits in Sudharma Sabha, even Lord Indra is not able to sit in it. But woe to these Kauravas who are so satisfied with the coveted throne of hundreds of humans. 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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