| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 35: साम्बका विवाह » श्लोक 23 |
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| | | | श्लोक 5.35.23  | अहो मदावलेपोऽयमसाराणां दुरात्मनाम्।
कौरवाणां महीपत्वमस्माकं किल कालजम्।
उग्रसेनस्य ये नाज्ञां मन्यन्तेऽद्यापि लङ्घनम्॥ २३॥ | | | | | | अनुवाद | | "अहा! इन निकम्मे, दुष्टचित्त कौरवों को अपने राजपद का कैसा अभिमान है? कौरवों का राजपद तो स्वयंसिद्ध है और हमारा तो समकालीन है - ऐसा सोचकर आज वे राजा उग्रसेन की आज्ञा का पालन नहीं करते, बल्कि उसका उल्लंघन कर रहे हैं॥ 23॥ | | | | "Oh! What kind of pride do these worthless, evil-minded Kauravas have in their kingship? The Kauravas' kingship is self-evident and ours is a contemporary one - thinking this, today they do not obey the orders of King Ugrasen; rather they are violating them.॥ 23॥ | | ✨ ai-generated | | |
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