श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 35: साम्बका विवाह  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  5.35.21-22 
ततो विदारिता पृथ्वी पार्ष्णिघातान्महात्मन:।
आस्फोटयामास तदा दिशश्शब्देन पूरयन्॥ २१॥
उवाच चातिताम्राक्षो भृकुटीकुटिलानन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महात्मा बलरामजी के पैरों की ठोकर से पृथ्वी फट गई और वे अपनी वाणी से सम्पूर्ण दिशाओं को गुंजायमान और कम्पित करने लगे तथा लाल नेत्रों और टेढ़ी भौंहों से वे बोले - ॥21-22॥
 
The earth was split open by the blow of Mahatma Balarama's feet and he began to resonate and vibrate all directions with his voice and with red eyes and crooked eyebrows he spoke - ॥21-22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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