श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 35: साम्बका विवाह  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.35.16 
प्रणतिर्या कृतास्माकं मान्यानां कुकुरान्धकै:।
ननाम सा कृता केयमाज्ञा स्वामिनि भृत्यत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में कुकुर और अंधक वंश के यादव हम माननीयों को प्रणाम करते थे। अब यदि वे ऐसा न करें तो ठीक है। परन्तु सेवक अपने स्वामी को आज्ञा कैसे दे सकता है?॥16॥
 
In earlier times the Yadavas from the clan of Kukura and Andhaka used to bow down to us, the honourable ones. Now if they don't do so, it's alright. But how can a servant give orders to his master?॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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