श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 35: साम्बका विवाह  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.35.15 
तद‍्गच्छ बल मा वा त्वं साम्बमन्यायचेष्टितम्।
विमोक्ष्यामो न भवतश्चोग्रसेनस्य शासनात्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अतः हे बलराम! आप जाएँ या रहें, हम आपके या उग्रसेन के आदेश से उस अन्यायी साम्ब को नहीं छोड़ सकते॥15॥
 
Therefore, O Balarama, whether you go or stay, we cannot spare the unjust Sambha by your or Ugrasena's orders.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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