| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 35: साम्बका विवाह » श्लोक 14 |
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| | | | श्लोक 5.35.14  | उग्रसेनोऽपि यद्याज्ञां कौरवाणां प्रदास्यति।
तदलं पाण्डुरैश्छत्रैर्नृपयोग्यैर्विडम्बनै:॥ १४॥ | | | | | | अनुवाद | | यदि उग्रसेन भी कौरवों को आज्ञा दे सकते हैं तो कौरवों के इस श्वेत छत्र का क्या प्रयोजन है, जो राजाओं के योग्य है? ॥14॥ | | | | If even Ugrasena can command the Kauravas then what is the purpose of this white umbrella of the Kauravas, which is worthy of kings? ॥ 14॥ | | ✨ ai-generated | | |
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