श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 35: साम्बका विवाह  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.35.1 
श्रीमैत्रेय उवाच
भूय एवाहमिच्छामि बलभद्रस्य धीमत:।
श्रोतुं पराक्रमं ब्रह्मन् तन्ममाख्यातुमर्हसि॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री मैत्रेयजी बोले - हे ब्राह्मण! अब मैं पुनः मतिमान बलभद्रजी के पराक्रम का वर्णन सुनना चाहता हूँ, आप कृपा करके वर्णन करें॥1॥
 
Shri Maitreyaji said – O Brahmin! Now I want to hear again about the bravery of Matiman Balbhadraji, you please describe. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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