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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 33: श्रीकृष्ण और बाणासुरका युद्ध
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श्लोक 48
श्लोक
5.33.48
योऽहं स त्वं जगच्चेदं सदेवासुरमानुषम्।
मत्तो नान्यदशेषं यत्तत्त्वं ज्ञातुमिहार्हसि॥ ४८॥
अनुवाद
तुम यह भलीभाँति समझ लो कि जो मैं हूँ, वही तुम भी हो, तथा यह सम्पूर्ण जगत्, देवता, दानव, मनुष्य आदि कोई भी मुझसे भिन्न नहीं है ॥48॥
You must understand well that what I am, you are, and this entire universe, gods, demons, humans etc., none are different from me. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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