श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 33: श्रीकृष्ण और बाणासुरका युद्ध  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.33.43 
तत्प्रसीदाभयं दत्तं बाणस्यास्य मया प्रभो।
तत्त्वया नानृतं कार्यं यन्मया व्याहृतं वच:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! कृपया प्रसन्न हो जाइए। मैंने बाणासुर को अभयदान दे दिया है। हे प्रभु! कृपया मेरे दिए हुए वचन को मिथ्या न कीजिए। ॥43॥
 
O Lord! Please be pleased. I have given protection to Banasura. O Lord! Please do not falsify the promise I have given. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)