vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 33: श्रीकृष्ण और बाणासुरका युद्ध
»
श्लोक 42
श्लोक
5.33.42
देवतिर्यङ्मनुष्येषु शरीरग्रहणात्मिका।
लीलेयं सर्वभूतस्य तव चेष्टोपलक्षणा॥ ४२॥
अनुवाद
आप समस्त प्राणियों के स्वरूप हैं। आप जो देवता, पशु और मनुष्य का रूप धारण करते हैं, वह आपके स्वतंत्र कर्मों का ही लक्षण है ॥ 42॥
You are the embodiment of all beings. The fact that you take the form of gods, animals and humans is only a sign of your independent actions. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×