vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 33: श्रीकृष्ण और बाणासुरका युद्ध
»
श्लोक 35
श्लोक
5.33.35
ततोऽर्कशतसङ्घाततेजसा सदृशद्युति।
जग्राह दैत्यचक्रारिर्हरिश्चक्रं सुदर्शनम्॥ ३५॥
अनुवाद
तब राक्षस लोक के शत्रु भगवान श्रीकृष्ण ने अपना सुदर्शन चक्र हाथ में लिया जो सैकड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी था॥35॥
Then Lord Krishna, the enemy of the demon world, took his Sudarshan Chakra in his hand which was as bright as hundreds of suns. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×