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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 33: श्रीकृष्ण और बाणासुरका युद्ध
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श्लोक 18
श्लोक
5.33.18
ततश्च क्षान्तमेवेति प्रोच्य तं वैष्णवं ज्वरम्।
आत्मन्येव लयं निन्ये भगवान्मधुसूदन:॥ १८॥
अनुवाद
तब भगवान मधुसूदन ने कहा, 'ठीक है, मैंने तुम्हें क्षमा कर दिया' और उस वैष्णव ज्वर को अपने में समाहित कर लिया ॥18॥
Then Lord Madhusudana said, 'Okay, I have forgiven you' and absorbed that Vaishnava fever into himself. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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