श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 33: श्रीकृष्ण और बाणासुरका युद्ध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.33.12 
ततो गरुडमारुह्य स्मृतमात्रागतं हरि:।
बलप्रद्युम्नसहितो बाणस्य प्रययौ पुरम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, अपने स्मरण मात्र से ही श्रीहरि गरुड़ पर सवार होकर बलराम और प्रद्युम्न के साथ बाणासुर की राजधानी में आये।
 
Then, by mere remembrance of Himself, riding on Garuda, Sri Hari along with Balarama and Pradyumna came to Banasura's capital.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)