श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 32: उषा-चरित्र  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.32.30 
अचिरादागमिष्यामि सहस्व विरहं मम।
ययौ द्वारवतीं चोषां समाश्वास्य तत: सखीम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
मैं शीघ्र ही आऊँगा, अतः अभी मेरा वियोग सहन करो।’ इस प्रकार अपनी सखी उषा को सांत्वना देकर चित्रलेखा द्वारकापुरी चली गई।
 
I will come soon, so bear with my separation for now. Having thus consoled her friend Usha, Chitralekha went to Dwarakapuri.
 
इति श्रीविष्णुपुराणे पञ्चमेंऽशे द्वात्रिंशोऽध्याय:॥ ३२॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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