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श्लोक 5.32.3  |
तनया भद्रविन्दाद्या नाग्नजित्यां महाबला:।
सङ्ग्रामजित्प्रधानास्तु शैव्यायां च हरेस्सुता:॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| नग्नजिति (सत्य) से महाबली भद्रविन्द आदि उत्पन्न हुए और शैव्य (मित्रविन्दा) से संग्रामजीत आदि उत्पन्न हुए॥3॥ |
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| From Nagnajiti (Satya) were born Mahabali Bhadravinda etc. and from Shaivya (Mitravinda) were born Sangramjit etc. 3॥ |
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