श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 32: उषा-चरित्र  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.32.3 
तनया भद्रविन्दाद्या नाग्नजित्यां महाबला:।
सङ्ग्रामजित्प्रधानास्तु शैव्यायां च हरेस्सुता:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
नग्नजिति (सत्य) से महाबली भद्रविन्द आदि उत्पन्न हुए और शैव्य (मित्रविन्दा) से संग्रामजीत आदि उत्पन्न हुए॥3॥
 
From Nagnajiti (Satya) were born Mahabali Bhadravinda etc. and from Shaivya (Mitravinda) were born Sangramjit etc. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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