श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 32: उषा-चरित्र  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.32.18 
यदा लज्जाकुला नास्यै कथयामास सा सखी।
तदा विश्वासमानीय सर्वमेवाभ्यवादयत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
परन्तु जब उषा ने लज्जा के कारण उसे कुछ नहीं बताया, तब चित्रलेखा ने उषा को सब कुछ गुप्त रखने का आश्वासन दिया तथा उससे सारी कहानी कहलवा दी।
 
But when Usha did not tell him anything due to shyness, then Chitralekha assured Usha that she would keep everything secret and made her tell the whole story. 18.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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