श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 32: उषा-चरित्र  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.32.13 
इत्युक्ता सा तया चक्रे कदेति मतिमात्मन:।
को वा भर्ता ममेत्याह पुनस्तामाह पार्वती॥ १३॥
 
 
अनुवाद
पार्वती के ऐसा कहने पर उषा ने यह सोचकर पार्वती से पूछा कि, ‘मैं सोचती हूँ कि ऐसा कब होगा? और मेरा पति कौन होगा?’ तब पार्वती ने उससे पुनः कहा-॥13॥
 
When Parvati said this, Usha asked Parvati about this, thinking, 'I wonder when this will happen? And who will be my husband?' Then Parvati said to her again -॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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