श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 32: उषा-चरित्र  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.32.12 
ततस्सकलचित्तज्ञा गौरी तामाह भामिनीम्।
अलमत्यर्थतापेन भर्त्रा त्वमपि रंस्यसे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तब सर्वशक्तिमान श्रीपार्वतीजी ने उस सुकुमारी कन्या से कहा - "अधिक व्याकुल मत हो, समय आने पर तू भी अपने पति के साथ आनन्दपूर्वक रहेगी।" ॥12॥
 
Then the all-powerful Sri Parvati said to that delicate girl - "Do not be too upset, in due course you too will enjoy the company of your husband." ॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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