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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 30: पारिजात-हरण
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श्लोक 51
श्लोक
5.30.51
जानामि ते पतिं शक्रं जानामि त्रिदशेश्वरम्।
पारिजातं तथाप्येनं मानुषी हारयामि ते॥ ५१॥
अनुवाद
मैं तुम्हारे पति शंकर को जानता हूँ और यह भी जानता हूँ कि वे देवताओं के स्वामी हैं, फिर भी मैं मनुष्य होकर तुम्हारा यह पारिजात वृक्ष ले रहा हूँ।॥ 51॥
I know your husband Śakra and also know that he is the lord of the gods, yet I, a human being, am taking this Pārijāta tree of yours.''॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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