श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.30.4 
स तां प्रणम्य शक्रेण सह ते कुण्डलोत्तमे।
ददौ नरकनाशं च शशंसास्यै जनार्दन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब इन्द्र सहित श्री जनार्दन ने देवी माँ को प्रणाम करके उन्हें उत्तम कुण्डल प्रदान किए और नरक में उनके मारे जाने का वृत्तांत सुनाया॥4॥
 
Then Shri Janardan, along with Indra, paid obeisance to Mother Goddess and gave her the best earrings and narrated to her the story of killing her in hell. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)