श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.30.36 
सत्यं तद्यदि गोविन्द नोपचारकृतं मम।
तदस्तु पारिजातोऽयं मम गेहविभूषणम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे गोविन्द! यदि आप सत्य कह रहे हैं और मेरा मनोरंजन नहीं कर रहे हैं, तो यह पारिजात वृक्ष मेरे घर का श्रृंगार बन जाए॥ 36॥
 
O Govinda! If what you are saying is true and not just to amuse me then let this Paarijaat tree be the ornament of my home.॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)